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फ्यूचर-रिलायंस सौदे पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, मामले की अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) को किशोर बियानी की अगुवाई वाली फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (FRL) और मुकेश धीरूभाई अंबानी की रिलायंस रिटेल के बीच 24,713 करोड़ के सौदे को मंजूरी देने से रोक दिया। ई-कॉमर्स की दिग्गज कंपनी अमेजन द्वारा अपील स्वीकार करते हुए शीर्ष अदालत ने अंतरिम आदेश जारी किया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि NCLT एफआरएल और रिलायंस के बीच लेन-देन के लिए मार्ग प्रशस्त करने की योजना को मंजूरी नहीं देगा। जस्टिस एफ नरीमन और बीआर गवई की पीठ ने फ्यूचर समूह की कंपनियों और बियानी को भी नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई पांच सप्ताह बाद होगी। पीठ ने यह स्पष्ट किया कि दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ मामले को आगे नहीं बढ़ाएगी क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने मामले को जांच के लिए स्वीकार कर लिया था।

बता दें दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ ई-कॉमर्स की दिग्गज कंपनी अमेजन की एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई कर रहा था। अमेजन ने दिल्ली उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ किशोर बियानी की अगुवाई वाली फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) और मुकेश धीरूभाई अंबानी के बीच 13 24,713 करोड़ के सौदे पर रोक लगाने की अपील की है।  जस्टिस एफ नरीमन और बीआर गवई की एक बेंच ने एफआरएल-रिलायंस सौदे पर यथास्थिति बहाल करने के लिए अमेजन द्वारा दायर याचिका की सुनवाई की।

बता दें अमेजन की याचिका में कहा गया है, '' अपील का कोई प्रावधान मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 17 (2) के तहत पारित आदेश के खिलाफ नहीं है। उत्तरदाताओं (एफआरएल) ने ईए आदेश को स्वयं चुनौती नहीं दी है, लेकिन ईए आदेश को लागू करने वाले एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देना पसंद किया है। " अमेजन ने यह भी कहा कि एकल न्यायाधीश का यथास्थिति आदेश अंतिम आदेशों तक पार्टियों के अधिकारों के संरक्षण के सीमित उद्देश्य के लिए पारित किया गया था और डिवीजन बेंच को अपना आदेश "जल्दबाजी" में जारी नहीं करना चाहिए था।

बता दें दिल्ली उच्च न्यायालय ने फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) और रिलायंस रिटेल के बीच 24,713 करोड़ रुपये के कारोबार अधिग्रहण के सौदे के संबंध में एकल न्यायाधीश के आदेश पर रोक लगा दी थी। पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) और बाजार नियामक सेबी जैसे सांविधिक निकायों को सौदे के संबंध में कानून के अनुसार आगे बढ़ने से रोका नहीं जा सकता है।


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