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राहत: 'विशप कॉनराड' से ही सीख लें स्कूलों के मठाधीश

राहत: 'विशप कॉनराड' से ही सीख लें स्कूलों के मठाधीश

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद विशप कॉनराड ने की 15 प्रतिशत फीस माफ, अभिभावकों को मिली राहत, लॉकडाउन में पढ़ाई ऑन लाइन होने से स्कूल के खर्चे हुए है कम  

बरेली। जहां एक ओर शहर केनामचीन स्कूल वाले आर्थिक तंगी से जुझ रहे अभिभावकों को फीस में एक रुपया भी छूट देने को तैयार नहीं है। वहीं दूसरी ओर शहर के नामचीन स्कूल विशप कॉनराड स्कूल ने सभी बच्चों की फीस में 15-15 प्रतिशत की छूट देकर कॉफी राहत दी। सत्र की शुरू  होने केबाद सुप्रीम केार्ट ने निर्देश दिए थे कि स्कूलों में लॉकडाउन के कारण ऑन लाइन पढ़ाई हुई है। स्कूल बंद होने से खर्चे भी बेहद कम हुए है इसलिए स्कूल वाले फीस में 15 प्रतिशत की फीस माफ करेंगे। जिसके बाद स्कूल की ओर से भी प्रत्येक अभिभावकों को 15-15 प्रतिशत की फीस माफ कर दी गई। अप्रैल में जब अभिभावकों को फीस बुक दी गई तो पिछले साल के मुकाबले कई सौ रुपए फीस कम दर्ज मिली। जब जिज्ञासा पूर्वक अभिभावकों ने सवाल पूछा तो स्कूल की ओर से कहा गया कि फीस में सभी को छूट दी गई है। स्कूल की इस पहल के शहर के बाकि नामी स्कूलों केमठाधीशों को पाठ पढ़ाया है। क्योंकि शहर के सभी नामचीन स्कूल वाले और मठाधीश स्टाफ की सैलरी और खर्चे को लेकर रो रहे है और अभिभावकों से पूरी फीस की डिमांड कर रहे है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के बाद प्रदेश सरकार ने भी आदेश दिया है कि सभी बोर्ड के प्राइवेट स्कूलों केा 15 प्रतिशत की फीस माफ करनी होगी।

परीक्षा शुल्क भी किया माफ 

विशप स्कूल की ओर से फीस में राहत देने केसाथ साथ परीक्षा शुल्क भी माफ कर दिया। स्कूल की ओर से कहा गया है कि परीक्षा और मासिक टेस्ट ऑन लाइन ही होंगे तो परीक्षा शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके अलावा किसी भी मद में फीस बढ़ाई ही नहीं गई है। 

अभिभावकों के साथ साथ स्टाफ की भी कर रहे मदद 

जहंा एक ओर शहर के नामचीन स्कूल वाले स्टाफ की सैलरी नहीं दे रहे है और फंड न होने का हवाला देकर नौकरी से निकाल रहे है तो दूसरी ओर किसी भी मिशनरीज स्कूल ने अपने स्टाफ को न नौकरी से निकाला न ही किसी की सैलरी रोकी। २०२० में भी कोरोना महामारी के दौरान विशप कॉनराड समेत बाकि स्कूलों में भी स्टाफ को पूरी सैलरी देने केसाथ साथ आर्थिक मदद भी दी गई। 

फीस मैसेज पर भी लगी है रोक 

विशप कॉनराड और बाकि मिशनरीज स्कूलों ने भी अभिभावकों की आर्थिक परेशानी को समझा। २०२० में कोरेाना महामारी के दौरान विशप समेत किसी भी मिशनरीज स्कूल ने फीस के लिए केाई एसएमएस अभिभावकों को नहीं भेजे न ही, अभिभावकों को फोन कॉल किए गए। फीस न मिलने पर किसी भी बच्चों को ऑन लाइन पढ़ाई से भी नहीं रोका गया। इस साल भी किसी भी मिशनरीज स्कूल ने अभिभावकेां  को फीस के लिए न मैसेज भेजे न ही ऑन लाइन पढ़ाई से बाहर  रखा। लेकिन शहर के बाकि स्कूलों ने फीस के लिए अभिभावकों को सीधे सीधे धमकाया भी। शासन ने भी इस साल अगस्त से पहले फीस के मैसेज भेजने पर रोक लगाई है। 

कई स्कूलों ने गोपनीय रखा है नाम 

शहर के कई मिशनरीज स्कूलों ने कोर्ट के आदेश के बाद फीस में नियमानुसार कटौती कर दी है। अभिभावकों को भी राहत दी है। लेकिन अपने स्कूल का नाम अखबार में देने से इंकार कर दिया। स्कूल की ओर से कहा गया कि शिक्षा के नाम पर व्यापार नहीं कर सकते। इसलिए इस बात पर स्कूल का नाम प्रकाशित के  लिए नहीं दे सकते। इसके अलावा स्टेशन रोड़ स्थित मिशनरीज स्कूल ने कई बच्चों की आधी आधी फीस भी माफ कर दी है तो कईयों की पूरी फीस माफ कर दी गई है। 

स्कूल एसोसिएशन ने ये कहा... 

जब फीस माफी केमुददे पर 2 टूक संवादाता ने इंडीपेंडिडेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष पारूष अरोरा से बात को इन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 15 फीस फीस माफी का जो आदेश दिया है वह उत्तर प्रदेश स्कूलों को नहीं दिया है वह राजस्थान प्रदेश केस्कूलों को दिया था। क्योंकि वहां पर गलत शासनादेश से भ्रम फैला था। इब इनसे पूछा गया कि आदेश देशभर के लिए है तो इन्होंने इस आदेश को मानने से साफ साफ इंकार कर दिया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य के लिए ये निर्देश जारी किए थे। सुप्रीम कोर्ट का आदेश पूरे देशभर के लिए होता है। 

हमने इस साल कोई फीस नहीं बढ़ाई है। सभी अभिभावकों को परीक्षा फीस मिलाकर 15 प्रतिशत कम फीस ली जा रही है। बाकि आगे देखते है हम अभिभावकों की किस प्रकार मदद कर सकते है। किसी भी अभिभावक को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी। क्या भी ऑन लाइन लगातार कराई जा रही है। 

फादर हेरोल्ड डिसूजा , प्रबंधक विशप कॉनराड स्कूल


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