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धर्म - कर्म :
17 या 18 सितंबर, जानें किस दिन रखा जाएगा जीवित्पुत्रिका व्रत

'नई दिल्ली,आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन जीवित्पुत्रिका व्रत रखा जाता है. इसे जितिया या जिउतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है. जितिया व्रत संतान की दीर्घायु, स्वस्थ और खुशहाल जीवन के लिए रखा जाता है. यह व्रत तीन दिन तक रखा जाता है. इसकी शुरुआत नहाए-खाए के साथ होती है. दूसरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है और तीसरे दिन व्रत का पारण किया जाता है. इस बार जितिया व्रत की तारीख को लेकर लोगों में बड़ी कन्फ्यूजन है. आइए आपको बताते हैं कि जितिया व्रत 17 या 18 सितंबर, किस दिन रखा जाएगा.'

कब है विश्वकर्मा पूजा? जानें, तारीख, पूजन विधि और महत्व

'नई दिल्ली,विश्वकर्मा जयंती साल में दो बार मनाई जाती है. विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर के दिन कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है, लेकिन वहीं राजस्थान और गुजरात के कुछ इलाकों में भगवान विश्वकर्मा का जन्म 7 फरवरी को मनाया जाता है. विश्वकर्मा पूजा को ही विश्वकर्मा जयंती और विश्वकर्मा दिवस के नाम से जाना जाता है. हिंदुओं के लिए यह दिन बहुत ही खास होता है क्योंकि इस दिन लोग अपने कारखानों और गाड़ियों की पूजा करते हैं. ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विश्वकर्मा ने सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी के सातवें पुत्र के रूप में जन्‍म लिया था. भगवान विश्वकर्मा का जिक्र 12 आदित्यों और ऋग्वेद में होता है. इस बार विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर, शनिवार के दिन मनाई जाएगी. '

कब से शुरू हैं नवरात्र, जानें कलश स्थापना का मुहूर्त और घटस्थापना विधि

'नई दिल्ली,हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत बड़ा महत्व है. नवरात्रि के इस समय में 9 दिनों के लिए मां दुर्गा को अपने घर में स्थापित किया जाता है. मां दुर्गा के नाम की अखंड ज्योति रखी जाती है. इस दौरान लोग मां दुर्गा की विधि विधान से पूजा करते हैं. नवरात्रि के इस पर्व के दौरान 9 दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. हिंदू पंचांग के अनुसार अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को शारदीय नवरात्रि का आरंभ होता है.'

भटकती आत्माओं को इस कुंड से मिलता है मोक्ष! पितरों को भी मिलती है मुक्ति

'नई दिल्ली, 10 सितंबर 2022 से शुरू हो चुके हैं जो 25 सितंबर 2022 तक चलेंगे. इन दिनों में श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करके पूर्वजों को यह बताया जाता है कि आज भी वह परिवार का हिस्सा हैं. पितृ पक्ष में सनातनी अपने पितरों को तारने के लिए पिंडदान की परंपरा निभाते हैं, लेकिन क्या आपने सोचा है प्रेत बाधा और अकाल मृत्यु वाले पितरों की आत्माओं को मुक्ति कैसे मिल सकती है'

ये थे देवी-देवताओं के इंजीनियर, रावण की लंका से लेकर कृष्ण नगरी द्वारिका इन्होंने ही बनाई

'नई दिल्ली,विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर यानी आज है. भगवान विश्वकर्मा को देवी-देवताओं का इंजीनियर कहा जाता है. ऐसा कहते हैं कि ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि का निर्माण किया था, लेकिन इसे सजाने-संवारने का काम विश्वकर्मा जी ने ही किया था. देवी-देवताओं के भवन, महल और रथ आदि के निर्माता भी स्वयं भगवान विश्वकर्मा ही हैं. क्या आप जानते हैं कि लंकापति रावण ने जिस सोने की लंका में सीता को कैद करके रखा था, वो भी विश्वकर्मा ने ही बनाई थी.'

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