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Last Updated at : Tuesday, Sep 27 2022 7:19AM

बड़ी कामयाबी: Cervical Cancer के लिए लॉन्च हुई पहली स्वदेशी वैक्सीन, इस बेहद खास टीके के बारे में जानिए

नई दिल्ली, कैंसर वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती गंभीर और जानलेवा बीमारियों में से एक है। हर साल लाखों लोगों की मौत कई प्रकार के कैंसर के कारण हो जाती है। सर्वाइकल कैंसर ऐसा ही एक बड़ा खतरा है, भारत में भी इसके रोगी काफी तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल 122,844 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का पता चलता है, वहीं 67 हजार से अधिक महिलाओं की इस बीमारी से मौत हो जाती है, हालांकि अब इस गंभीर खतरे को कम किया जा सकेगा। गुरुवार 1 सितंबर को सर्वाइकल कैंसर के लिए देश की पहली स्वनिर्मित वैक्सीन लॉन्च की गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैक्सीन इस गंभीर रोग की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। 

इससे पहले  सर्वाइकल कैंसर के लिए अब तक यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा अनुमोदित 'गार्डासिल 9' नामक एचपीवी वैक्सीन दी जा रही थी। अध्यनों में पाया गया है कि यह वैक्सीन  योनि और वुल्वर कैंसर के खतरे को भी कम करने में लाभकारी हो सकती है।

सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर है। यह गर्भाशय ग्रीवा में विकसित होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार, 2018 में दुनियाभर में अनुमानित 570 000 महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का पता चला था और लगभग 3.11 लाख महिलाओं की इससे मृत्यु हो गई थी।

एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) और डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (डीबीटी) ने पहले स्वदेशी रूप से विकसित क्वाड्रिवेलेंट ह्यूमन पैपिलोमावायरस वैक्सीन (क्यूएचपीवी) को लॉन्च किया है। सर्वाइकल कैंसर  के लिए 'मेड इन इंडिया' इस वैक्सीन को लेकर विशेषज्ञों में काफी उत्साह है।

नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन (एनटीएजीआई) में कोविड वर्किंग ग्रुप के चेयरपर्सन डॉ एन.के अरोड़ा ने कहा कि मेड-इन-इंडिया वैक्सीन लॉन्च करना एक रोमांचक अनुभव है। यह महिलाओं में बढ़ती एक गंभीर समस्या की रोकथाम की दिशा में बड़ा कदम साबित होने वाला है। 

वैक्सीन लॉन्च के मौके पर सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने बताया कि दिसम्बर से जनवरी के बीच वैक्सीन का निर्माण शुरू हो जाएगा और दो साल में दो सौ मिलियन डोज़ का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। सर्वाइकल कैंसर के इस टीके की कीमत 200 से 400 रुपये के बीच हो सकती है, सरकार से बात करके दाम तय किया जाएगा। देश के लिए यह बड़ी कामयाबी है, उम्मीद है कि इससे हर साल होने वाली लाखों मौतों के जोखिम को कम किया जा सकेगा।

सर्वाइकल कैंसर की इस स्वदेशी वैक्सीन के बारे में डॉ एन के अरोड़ा ने बताया- करीब 90 प्रतिशत सर्वाइकल कैंसर के केस ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) वायरस के कारण होते हैं। परीक्षण में इस टीके को इस वायरस के खिलाफ काफी असरदार पाया गया है। अगर इस वैक्सीन को युवाओं को दिया जाए तो इससे अगले 30 साल तक उन्हें इस गंभीर प्रकार के कैंसर के जोखिम से बचाया जा सकता है। यह वैक्सीन हर साल लगभग लाखों महिलाओं की इस कैंसर से होने वाली मौत के जोखिम को कम करने में मदद कर सकेगी। 

डॉ अरोड़ा कहते हैं, सर्वाइकल कैंसर को लेकर उपलब्ध वैक्सीन की दुनियाभर में बड़ी कमी देखी जा रही थी, हालांकि अब हमारे पास स्वदेशी टीके उपलब्ध होंगे और हमें उम्मीद है कि इसे 9-14 साल की लड़कियों के लिए राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के रूप में उपलब्ध करके उन्हें भविष्य के एक बड़े खतरे से सुरक्षित करने में मदद मिल सकेगी। 

प्रारंभिक चरण के सर्वाइकल कैंसर में आमतौर पर कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं, यही कारण है कि इसका अंदाजा लगा पाना काफी कठिन हो जाता है। कैंसर बढ़ने के साथ इसके लक्षण दिख सकते हैं। इसमें संभोग के बाद, मासिक धर्म के बीच या रजोनिवृत्ति के बाद योनि से खून बहने की समस्या और पैल्विक हिस्से में या फिर संभोग के दौरान दर्द की समस्या होती रह सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अधिक लोगों के साथ यौन संबंध रखने, धूम्रपान करने या फिर प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी के कारण इस कैंसर के विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। 


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